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जो अबला नहीं बन सकी वो दुष्चरित्र बन गई.....

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आजकल हर ओर दयाशंकर सिंह के बेतुकेे वाहियात बयान और उसके बाद बीएसपी की ओर से दी गई अमर्यादित टिप्पठियों की चर्चा है। न ही दयाशंकर को न बीएसपी कार्यक्रर्ताओं को महिलाओं के अपमान का कोई हक है। लेकिन जब चर्चाओं का दौर छिड ही गया है तो बरबस ही समय-समय पर हमारे राजनीतिज्ञो द्वारा की गई कुछ बयानबाजी याद आ गई…….
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50 करोड की गर्लफ्रेंड सुनंदा पुष्कर -प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
अब कपड़ा मंत्रालय मिला है, मैडम अपना तन ढक सकेंगी-अली अनवर, जेडीयू

साउथ की महिलाओं का रंग भले ही सांवला होता है, मगर वो सेक्सी होती हैं- शरद यादव,जेडीयू

दो लड़के मिलकर एक लड़की का रेप कर ही नहीं सकते- मुलायम सिंह यादव, एसपी

लड़कों से गलतियां हो जाती हैं- मुलायम सिंह यादव

रामपुर में नाचने वाली आम्रपाली (जयप्रदा) भी सांसद बन गई थी- आज़म खान, एसपी

बिहार की सड़कें हेमा मालिनी के गाल की तरह बना देंगे- लालू प्रसाद यादव, आरजेडी

स्मृति ईरानी मोदी की दूसरी पत्नी हैं- नीलमणि सेन डेका, नेता कांग्रेस।

दयाशंकर की गाली अपनी मां और बेटी के लिए — मायावती बसपा

ये हैं हमारे सम्माननीय नेताओं की सोच के कुछ नमूने ये देंगे औरत को सम्मान
इस हमाम मे सब नंगे हैं लेकिन एक-दूसरे को आईना दिखाने से कोई नहीं चूकता।
नारी अबला हो या सबला इस देश मे सम्मान पाना उसके लिए आसान नहीं है क्योंकि हमारे समाज में दोगली मानसिकता वालों की बहुतायत है ये वो लोग हैं जो नवरात्र में कन्या पूजन करते हैं और बाद में भ्रूण हत्या । और हमारे इसी समाज से निकलकर आए हैं हमारे नेता फिर इनकी मानसिकता क्यों अलग होगी।
हम सभी को आगे बढ़ने के लिए दूसरों की टांग खीचने में बढ़ा मजा आता है(सही या गलत तरीके से आगे बढ़े ये इतना मायने नहीं रखता सबके लिए)। जब कोई लड़का आगे बढ़ रहा हो तो उसे गिराने के लिए हजार हथकंडे अपनाने पड़ते हैं,लेकिन अगर लड़की है तो काम आसान है,सीधा करैक्टर पर वार करों ,दो चार छीटे दामन पर पड़ेगे तो घर में मुंह छुपाकर बैठ जाएगी,अगर नहीं बैठी तो परिवार और समाज ताने देकर बैठा देगा। यदि फिर भी नहीं मानती है उठकर सवाल पूछती है तो दुष्चरित, कुल्टा,वेश्या जैसी कई उपाधिया देने के लिए समाज के ठेकेदार मौजूद है। वो ठेकेदार जो जब मन आए अपने मतलब के लिए किसी औरत के सम्मान के लिए आंसू बहाते है और जब मौका मिले किसी और औरत पर कीचड़ उछाल देते हैं।

दयाशंकर ने कुछ अलग नहीं किया उन्होंने भी वही किया जो अकसर समाज में होता है चुंकि आपके सामने एक महिला प्रतिद्वंदी है,तो उसके चरित्र पर सवाल उठा दिया,ताकि वह कमजोर पड़ जाए। आप उसी मानसिकता से ग्रस्त हैं जो सदियों से हमारे समाज की औरतों को पीछे ठकेलती आई है,जो ये मानती है कि जो औरत घर से बाहर निकलती है वो गलत है आपकी नज़र में औरत के बस दो ही रूप हैं या तो वो अबला है या दुष्चरित्र। औरत का मजबूती से खड़े होना अपने विचार रखना आपको गंवारा नहीं। मायावती तो उनसे भी बढ़कर निकली दयाशंकर ने तो पुरूषवादी मानसिकता का परिचय दिया पर आप तो महिला थी आपने और आपके कार्यक्रर्ताओं ने भी प्रतिउत्तर में महिलाओं के चरित्र को ही दागदार किया। आपकी पार्टी कार्यक्रर्ता आपको बहनजी कहते हैं लेकिन यदि आप वाकई बहनजी थी तो किसी की मां,बेटी,पत्नी पर उठी टिप्पठीयों के बाद आपके जमीर ने आपको नहीं धिक्कारा।
ये बहस ये प्रदर्शन,ये नारेबाजी आसानी से खत्म नहीं होगी आगामी यूपी चुनाव से पहले बीएसपी और भाजपा को एक मुद्दा मिल चुका है ,तो उसे पूरी तरह भूनाए बिना कौन छोड़ना चाहेगा। आप सब लगे रहिए अपनी-अपनी राजनीतिक रोटियां सेकेने में। रही बात औरत के सम्मान की तो हम औरतें सदियों से अपने वजूद और सम्मान के लिए लड़ती आई हैं लड़ती रहेंगी आप की ओछी राजनीती से न किसी औरत का भला हो सकता है,न देश का….



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