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हर मौत को शहादत मत बनाओ मौत शरमा जाएगी.....

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मौत ये शब्द जिंदगी मे हमने कई बार सुना होगा। एक ऐसा शब्द जो पूरी जिंदगी का अस्तित्व मिटा देता है। जिसे सुनकर ही लोगों के रोंगटे खड़े होते हैं । मौत हमेशा मातम लेकर आती है । मरता एक इंसान है लेकिन उसके लिए जिंदगी भर जाने कितने अपने तड़पते है । अगर हमारे आसपास का कोई व्यक्ति   जिसे  हम पसंद नही करते हैं और उसकी मृत्यु की बात सुने तो भी कुछ समय के लिए शिकवे गिले भूलाकर उसके लिए मौन या शांति प्रार्थना कर लेते हैं। यही तो है हमारी हिंदुस्तानी संस्कृति फिर मरने वाला चाहे हिंदू हो या मुसलमान ।
ऐसे दुखदाई शब्द पर चर्चा करना  पसंद नहीं है मुझे। लेकिन आज अपने दिल की भड़ास को शब्दों का रूप देने से रोक नहीं पाई। पहली बार मुझे किसी की मौत पर नहीं बल्कि उसकी मृत्यु के बाद मनाए जा रहे शोक के तरीके और शोक मनाने वाले लोगों को देखकर दुख हो रहा है, और मुझे विश्वास है कि मेरे जैसे कई भारतीय इस तकलीफ से गुजर रहे होंगे ।
#बुरहान नाम के आतंकी की मौत ने देशभर में कई चर्चाओं को जन्म दिया। हमारे देश की सेना ने एक आतंकवादी को मार गिराया हर और मानवाधिकार का शोर सुनाई देने लगा । आतंकी की मौत के बाद कश्मीर मे लगी चिंगारी देखते ही देखते भयंकर आग बन गई । उस आतंकवादी के पक्ष मे आम कश्मीरी युवा ही नहीं बल्कि देश का एक कथित बुद्धिजीवी वर्ग खड़ा था । लोग उसके अधिकारों की बात करने लगे । उसे गुमराह, मासूम ,कश्मीरी युवाओं का प्रतिनिधि और न जाने क्या क्या साबित करने की होड़ लग गई । हद तो तब हो गई जब लोगों ने उसकी तुलना शहीद भगत सिंह से कर दी। उसे भटका हुआ बताकर तरफदारी करने वालों ने शायद कभी आतंकी हमले मे कोई अपना नहीं खोया होगा इसलिए आतंकी से देशभक्तो की तुलना करना इनके लिए आसान रहा होगा ।
बुरहान को कम उम्र का भटका नौजवान बताने वाले ये क्यों भूल गए कि यदि वह जिंदा होता तो बाकी आतंकीयो की तरह कितनी जाने लेता। हर साल आतंकी हमलों में हमारे देश ही नहीं दुनिया भर मे कितने मासूम मारे जाते हैं । हमें एक बुरहान को छोड़ देना चाहिए था ताकि और हजारों जाने जाए। लोग कहते हैं कि आतंकी यूंही नहीं बनते हैं हालात जिम्मेदार होते हैं ।मैं भी इस बात को मानती हूं कि कहीं कुछ तो गलत हो रहा होगा जो हमारे देश के युवा रास्ता भटक रहे हैं पर हर हालात का मारा आतंकी तो नहीं बन जाता है । यदि हम (खासकर मीडिया ) ऐसे लोगों को महिमामडित करते हैं तो हम युवाओं को यह संदेश नहीं दे रहे हैं कि आपका असंतोष आपको एके47 उठाने की इजाजत देता है । यदि हम कुछ अपवादो को छोड़ दे तो अधिकतर क्रिमिनल की जिंदगी मे कुछ बुरी घटनाएँ जरूर होती हैं जो उन्हें बुरे रास्ते पर जाने के लिए प्रेरित करती हैं ।यदि आर्मी का बुरहान को मारना गलत है तो फिर आर्मी और पुलिस का होना ही गलत है। जो मीड़ियाकर्मी एसी स्टुड़ियो मे बैठकर आतंकी के पक्ष मे कसीदे पढ़ते हैं जरा एक बार खुले मन से सोचकर देखे यदि आर्मी वाले रेगिस्तान की गर्मी मे तपती रेत और कश्मीर की कपा देने वाली ठंड की ड्यूटी छोड़कर घर बैठ जाए तो स्टूडियो क्या ये अपने घरों मे भी सुरक्षित रह पाएँगे??मानवता की दुहाई देने वालो से मैं जानना चाहती हूं कि आर्मी ने तो केवल बुरहान को गोली मारी है आईएसआईएस जैसे संगठनों के जान लेने के बर्बर तरीकों के बारे मैं उन्होंने नहीं सुना यही आतंकी यदि जिंदा होता और बेरहमी से किसी की जान लेता तो मानवता का कुछ न बिगड़ता???
आजकल मानवाधिकार पर चर्चा बहुत होती है
मानवाधिकार बहुत भारी भरकम शब्द है ये   जब बचपन मे स्कूल की किताब मे  पहली बार ये शब्द पढ़ा था तो यही सोचा था । लेकिन फिर टीचरों से पता चला कि यह बहुत महत्वपूर्ण शब्द है इसके मायने भी बहुत खास है । मानवाधिकार  ह्यूमन राइट्स यानी हम इंसानो के अधिकार वो हक जो सामाजिक, कानूनी और धार्मिक हर रीत से हमें मिलने ही चाहिए जैसे जीने का हक। बचपन मे तो सब बच्चों की तरह इसका अर्थ रट लिया था, लेकिन जब बड़े हुए तो इस शब्द के हैरान कर देने वाले प्रयोग देखकर दिल डर सा गया।
हमारे देश के जाने कितने जवान कम उम्र मे शहीद का तमगा हासिल करते हैं उनके परिवार जिंदगी भर उनके लिए रोते हैं लेकिन कोई मानवाधिकार की बात नहीं करता पर अपराधियों के मरने पर मानवाधिकार याद आ जाते हैं । कुछ लोग बुरहान के मरने के बाद घाटी मे फैले तनाव और उसमें मरे लोगों का मातम मना रहे हैं अच्छी बात है मनाइये लेकिन घाटी मे उन कथित आम लोगों की पत्थरबाजी मे मरे और घायल लोगों के लिए भी कुछ आंसू बहा लीजिए वो भी इंसान थे किसी के बेटे,भाई ,पती,पिता होंगे। कई बार आरोप लगते हैं कि सेना के हमले मे कई बेगुनाह मरते हैं या सेना से कुछ गलतियां होती हैं।माना कई बार ऐसा हुआ होगा क्योंकि सेना मे भी इंसान ही होते हैं जब परिस्थितिया गलत हो जाने अनजाने गलतियां भी हो जाती हैं ।लेकिन आतंकीयो से लड़ने के लिए सेना से बेहतर विकल्प कोई और मौजूद है? ? कुछ लोगों का कहना है कि कश्मीर समस्या का सेना से नहीं राजनीतिक हल निकालना चाहिए ।ऐसे लोगों से कोई पूछो भारत की आजादी से आज तक कश्मीर मुद्दे से ज्यादा राजनीति कहीं हुई है । कश्मीर मे कोई जादू की छड़ी नहीं है जो यूंही समस्याए हल हो जाएगी। न सभी राजनीतिक न ही सभी पत्रकार इस मुद्दे पर उचित दिशा मे आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे कम से कम सेना को ही कुछ करने दीजिए । कश्मीर में आतंकवाद के मुद्दे पर हाथ पर हाथ रखकर बैठना भी तो सही नहीं होगा। कश्मीर के हाल को आतंकवादीयों पर छोड़ने से तो अच्छा है कि हम इसे सेना पर छोड़ दें।’
बुरहान की मौत के बाद  पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के बयानों को जब सुना तो सोचा अरे इनके हमारे शिकवे तो दुनिया जानती है।लेकिन जब कुछ पत्रकारों को आतंकी को हीरो बनाते देखा तो सिर शर्म से झुक गया। जब मैं पत्रकारिता की पढ़ाई कर रही थी तो सीनियर जर्नलिस्टो को देखकर दिल मे एक श्रद्धा जागती थी सोचती थी कब इनके जैसे बन पाएगे। आज उनमें से कुछ के ट्वीट देखकर खुद को मीडिया वाला कहने मे शर्म आती है । एक  नामी जर्नलिस्ट का  ट्वीट देखा उन्होंने बुरहान की मौत पर जमकर हंगामा किया इनका कहना है कि कश्मीर मे बेरोजगारी की वजह से आतंकवादी हैं अरे जनाब हम भारत नाम के एक विकासशील देश मे रहते हैं जहां कई राज्यों मे बेरोजगारी की समस्या है तो सब आतंकवादी बन जाए। इनसे एक कदम बढ़कर एक ने आतंकवादी की तुलना भगत सिंह से कर दी। इनसे तो बस इतना ही कह सकते हैं कि अगर आपका कोई अपना कहीं बाहर जा रहा हो तो उसे सावधान रहने को कहिएगा क्योंकि आजकल सभी जगहों पर रेलवे स्टेशन,एयरपोर्ट, शापिंग माल्स आदि पर आतंकी खतरा रहता है । जब कोई बम फटता है तो पूछकर नहीं फटता कि कौन यहां हिंदू, मुसलमान, सेकुलर, आतंकवादी विरोधी या समर्थक है । भगवान न करे कभी आपका कोई अपना आतंकवादी हमले का शिकार हो वरना शहीद भगत सिंह और आतंकवादी में अंतर समझने मे आपको देर नहीं लगेगी ।
जिसने भी जन्म लिया उसे एक दिन इस दुनिया से जाना पड़ता है लेकिन सबके जाने के तरीके अलग होते हैं ।कोई मरता है, कोई शहीद होता है किसी की हत्या होती है और किसी को सजा दी जाती है ये अंतर सरकार या कोई संगठन तय नहीं करते ये इंसान के अपने कर्म और सोच तय करते हैं । इसलिए हर मौत एक जैसी नहीं होती न ही हर मातम एक जैसा।



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11 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jlsingh के द्वारा
July 25, 2016

बेहतरीन आलेख और बेहतरीन सम्मान भी ! बधाई!

yatindrapandey के द्वारा
July 23, 2016

हैलो मैं यतीन्द्र बहुत दिन बाद आज मंच पर आया और पहले आप से ही मुलाकात हुई क्युकी आप आँखों के सामने पड़ी पढ़ कर अच्छा लगा बस एक शब्द बेहतरीन

    pragati के द्वारा
    July 26, 2016

    धन्यवाद यतीन्द्र जी

Ashish Gonda के द्वारा
July 22, 2016

सादर अभिवादन मैम! उम्दा आलेख लिखा आपने, जिस सम्मान के हक़दार आपके शब्द थे उन्हें वो मिला, “बेस्ट ब्लॉगर ऑफ़ द वीक” बनने पर हार्दिक बधाई..dB

    pragati के द्वारा
    July 22, 2016

    धन्यवाद आशीष जी..

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
July 21, 2016

प्रगति ,,,उत्म आभास ,,किंतु अपनी प्रगति ,,अपनी प्रगति ना ला पाने या उसमैं शीघ्रता लाने के लिए ही ब्राह्मणत्व का ऩाश होता है । लूट मची है ।,,लूट …..राम नाम की लूट है लूट सके तो लूट ,,,अंत काल पछतायेगा प्राण जायेंगे छूट ,,,,,ओम शांति शांति …प्रगति 

    pragati के द्वारा
    July 15, 2016

    धन्यवाद

rameshagarwal के द्वारा
July 13, 2016

जय श्री राम प्रिय प्रगति जी एक पत्रकार होते ऐसा सुन्दर लेख पढ़ कर खुशी हुई.देश में एक सेक्युलर ब्रिगेड जिसमे नेता,पत्रकार और कुछ मूर्ख बुद्दिजीवी है जिनको आतंवादियो और मुसलमानों से बहुत सहानुभूति है ये लोग जो मानवाधिकार की बात करते कभी कश्मीर पंडितो पर आंसू बहते जब नागरिक और सेना की लोग मरते चुप रहते दादरी में एक मुसलमान मारा गया महीनो तक टीवी पर बोले हिन्दू मारे जाते चुप रहते आतंकवादी पढ़े अच्छे घर के लोग भी है.यदि ऐसा है तो कश्मीर पंडितो और दलितों को बहुत पहले आतंकवादी बन जाना चाइये ऐसी आवाज़ केवल भारत में सुनाई देग्ती है.

Shobha के द्वारा
July 13, 2016

प्रिय प्रगति नाम को सार्थक करता लेख उत्तम लेख तुम्हार भविष्य उज्ज्वल है तुम जैसे पत्रकार चाहिए “जब कुछ पत्रकारों को आतंकी को हीरो बनाते देखा तो सिर शर्म से झुक गया। जब मैं पत्रकारिता की पढ़ाई कर रही थी तो सीनियर जर्नलिस्टो को देखकर दिल मे एक श्रद्धा जागती थी सोचती थी कब इनके जैसे बन पाएगे। आज उनमें से कुछ के ट्वीट देखकर खुद को मीडिया वाला कहने मे शर्म आती है । एक नामी जर्नलिस्ट का ट्वीट देखा उन्होंने बुरहान की मौत पर जमकर हंगामा किया इनका कहना है कि कश्मीर मे बेरोजगारी की वजह से आतंकवादी हैं अरे जनाब हम भारत नाम के एक विकासशील देश मे रहते हैं जहां कई राज्यों मे बेरोजगारी की समस्या है तो सब आतंकवादी बन जाए। इनसे एक कदम बढ़कर एक ने आतंकवादी की तुलना भगत सिंह से कर दी। अति उत्तम

    pragati के द्वारा
    July 13, 2016

    धन्यवाद 


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