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नारी अबला या शक्ति का स्वरुप ?????

Posted On: 14 Apr, 2014 Others में

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टी. वी पर इन दिनो एक र्चचित शो आता है जिसका नाम है महाभारत । इसे देखते हुये मन मे कई प्रकार के सवाल उठते परन्तु सौभाग्य से इन सवालो के जवाब शो के दौरान कही न कही मिल जाता है ,क्योकी यह धर्म से जुूङा हुआ शो है और धर्म को अगर विवादो एंव अंधविश्वासो से परे रखकर उसके मूल रुप को समक्षने का प्रयत्न करे तो यह जीवन जीने की कला सिखाता है और जीवन एंव समाज से जुङे सवालो का हल देता है , हिन्दु मान्यता के अनुसार जो धारण करने योग्य है वही धर्म है।
महाभारत मे द्रौपदी के चीरहरण का प्रसंग देखा देख कर मन विचलित हो गया यह कैसी दोहरी व्यवस्था है जिस देश और धर्म मे नारी को नारायणी का दर्जा है जँहा कन्या पूजन की परम्परा है वहाँ यह अनर्थ कैसे हुआ वह भी उस सभा मे जहा विदुर जैसे ज्ञानी भीष्म जैसे द्रढ प्रतिज्ञ द्रोण जैसे योद्धा उपस्थित है और उन सभी की सहानभुती द्रौपदी के साथ थी । वीर योद्धा पाणवो की पत्नी अधर्मियो के क्रुर जाल मे फसकर अपमानित होने पर मजबूर थी । इसका क्या कारण था मुक्षे तो एक ही कारण समक्ष आया जब आसुरी प्रवत्तिया अधर्मी व्यक्ती अपने घमंण मे चूर हो जाता है तो सही गलत का ज्ञान भूल जाता है अपने स्वार्थ एंव सुख के लिये वो उन्है सताता है जिन्है वह कमजोर समक्षता है परन्तु वास्तविक्ता मे वही उसके पतन का कारण बनते है नारी को अबला समक्षने वाले भूल जाते है की नारी दुर्गा का रुप है। द्रौपदी की लाज बचाने के लिये कान्हा आये थे परन्तु आज के समय मे भी हमारे देश मे कौरवो की कमी नही है उस समय तो केवल 100 कौरव थे परन्तु आज तो संख्या बहुत अधिक है कान्हा न सही इस युग मे परन्तु पापियो को रोकने की कोई व्यवस्था तो होनी चाहिये ऐसे पापियो को सजा देने के लिये देश के कानुन ने व्यवस्था की है पर यह क्या कौरवो की रक्षा के लिये धतराष्ट्र भी मौजुद है हमारे देश मे ………
देश के एक प्रमुख राज्य उत्तर प्रदेश मे सत्ताधारी दल के प्रमुख का बयान काबिलेगौर है ” लडको से गलती हो जाती है बलात्कार के लिये फांसी उचित नही ” सपा प्रमुख ने शायद महाभारत नही देखी या अपने धर्म देश जातिय गौरव को पुर्णता भुला चुके है यदुवंशीय कान्हाँ के आदर्शो को समक्षने की क्षमता श्री मुलायम यादव मे नही है वरना वो समक्ष पाते की एक द्रौपदी के अपमान ने महाभारत की नीव रखी थी शक्तिशाली कुरुवंश मे प्रलय मचा दी बलवान सत्ताधारियो की सत्ता ही नही जीवन समाप्त हो गया। द्रौण भीष्म जैसे महारथीयो को तो सिर्फ मौन की सजा मत्यु के रुप मे प्राप्त हुयी । नारी का अपमान करने वाले अकसर भूल जाते है की क्रौध एंव अपमान मे जलती नारी कब अबला से बला बन जाये समक्षना मुश्किल है इतिहास गवाह है बडे-बडे योध्दाओ को नारी शक्ती के आंगे सम्मान से छुकना पडा है। जननी जो विश्व की रचना का कारक है उसका अपमान ईश्वर को भी बर्दाश्त नही। जिनमे स्रजन की क्षमता है विनाश की ताकत भी उसमे छुपी होती है । आज की नारी को भी स्वंय यह समक्षना होगा की वह अबला नही है उसका अपमान करने वाली शक्तियो को उसे रोकना होगा । कुछ भी बयान देने से पहले राजनेताओ को यह याद रखना चाहिये जैसे ध्रतराष्ट्र की सत्ता द्रौपदी के कारण नष्ट हुयी उसी तरह आज भा यदि आधी आबादी चाहे तो किसी भी दल को सदा के लिये सदा के लिये सत्ता से बेदखल कर सकती है………….



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